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हमारी पृथ्वी ( Our Earth )

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Video हमारी पृथ्वी ( Our Earth ) पृथ्वी की परिभाषा (Definition of Earth):-   पृथ्वी सौरमंडल का एक ग्रह है, जिस पर जीवन की सभी संभावित तत्व  (जैसे :- जल, वायु, भूमि तथा अनुकूल तापमान ) उपलब्ध है जिसके कारण यहाँ जीव-जंतु और मनुष्य का अस्तित्व कायम है।  जो सूर्य से तीसरा ग्रह है।  यानि सौरमंडल में इसका स्थान ( सूर्य से क्रमशः बुध 🠊 शुक्र 🠊 पृथ्वी 🠊मंगल ) है।  पृथ्वी की आकर  (Shape of Earth):- पृथ्वी का  वास्तविक आकार "भू- आभ (Geo-id ) के आकार का है , जो पूरी तरह से नहीं बल्कि लगभग गोल होता है।  पृथ्वी भी पूरी तरह से गोल नहीं है।  इसके दोनों ध्रुव   (ऊपर, उतरी ध्रुव और निचे, दक्षिणी ध्रुव ) थोड़ी चपटी, थोड़ी उबड़-खाबड़  है और भूमध्य रेखा उभरा हुआ है।  

हमारी नदियाँ (Our Rivers )

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Video हमारी नदियाँ  ( Our Rivers ) नदी की मूल परिभषा (Basic Definition of River)  जल का वह प्राकृतिक प्रवाह (बहाव) है,जो पर्वतों , झीलों या हिमनदों से निकल कर मैदानों से होकर बहता है और अंत में किसी समुद्र, झील या दूसरे नदी में मिल जाता है   "नदी कहलाती  है। " नदी के प्रकार (Types of River) नदियों को उनके जल स्रोत और प्रवाह के आधार पर छः प्रकारों में बाँटा जाता है, जैसे:- 1. स्थायी नदियाँ (Perennial Rivers ):- वैसी नदियाँ जो सालोभर जल से भरी रहती हैं। जिनका जल स्रोत हिमनद (Glaciers ) और वर्षा  (Rain) होता है। ऐसी नदियाँ गर्मियों में भी नहीं सूखतीं।  ऐसी नदियाँ बड़े मैदान और डेल्टा का निर्माण करती है। जैसे :- गंगा, ब्रह्मपुत्र, नील और अमेजन आदि।  ऐसी नदियाँ  अधिकांशतः हिमालयी होती है। इसे बारहमासी नदियाँ भी कहा जाता है।   2. मौसमी नदियाँ (Seasonal Rivers ):- वैसी नदियाँ जो केवल वर्षा ऋतू में बहती है और गर्मी में सुख जाती है। जिनका जल स्रोत केवल वर्षा होती है। इसका जल प्रवाह अनियमित और कम गहराई का होता है। जैसे :- लूनी नदी, घघगरा नदी, ...

पानी बचाओ - जीवन बचाओ !

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पानी बचाओ - जीवन बचाओ ! पानी प्रकृति का वह अमूल्य उपहार है, जिसके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। मानव शरीर का लगभग 70 प्रतिशत भाग पानी से बना है। न केवल मनुष्य, बल्कि पशु, पक्षी, पेड़-पौधे और समस्त जीव-जगत पानी पर ही निर्भर हैं। इसी कारण पानी को जीवन का आधार कहा गया है। आज पृथ्वी पर जल की उपलब्धता असमान होती जा रही है। समुद्रों में जल प्रचुर मात्रा में है, परंतु वह खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं है। जो थोड़ा-सा मीठा पानी उपलब्ध है, वह नदियों, झीलों, तालाबों और भूमिगत जल के रूप में है। बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, औद्योगिक विकास और आधुनिक जीवनशैली के कारण इस सीमित जल का अत्यधिक और अनियंत्रित दोहन किया जा रहा है। वर्तमान समय में जल संकट एक गंभीर वैश्विक समस्या बन चुका है। अनेक स्थानों पर भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। कहीं सूखा पड़ रहा है तो कहीं बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो रही है। इसका मुख्य कारण है—जल का अपव्यय, वर्षा जल का संरक्षण न करना, जंगलों की कटाई और जल स्रोतों का प्रदूषण। कारखानों का गंदा पानी नदियों में छोड़ दिया जाता है, जिससे जल अशुद्ध हो जाता है और उपयो...