हमारी नदियाँ (Our Rivers )
हमारी नदियाँ ( Our Rivers )
नदी की मूल परिभषा (Basic Definition of River)
जल का वह प्राकृतिक प्रवाह (बहाव) है,जो पर्वतों , झीलों या हिमनदों से निकल कर मैदानों से होकर बहता है और अंत में किसी समुद्र, झील या दूसरे नदी में मिल जाता है "नदी कहलाती है। "
नदी के प्रकार (Types of River)
नदियों को उनके जल स्रोत और प्रवाह के आधार पर छः प्रकारों में बाँटा जाता है, जैसे:-
1. स्थायी नदियाँ (Perennial Rivers ):- वैसी नदियाँ जो सालोभर जल से भरी रहती हैं। जिनका जल स्रोत हिमनद (Glaciers ) और वर्षा (Rain) होता है। ऐसी नदियाँ गर्मियों में भी नहीं सूखतीं। ऐसी नदियाँ बड़े मैदान और डेल्टा का निर्माण करती है। जैसे :- गंगा, ब्रह्मपुत्र, नील और अमेजन आदि। ऐसी नदियाँ अधिकांशतः हिमालयी होती है। इसे बारहमासी नदियाँ भी कहा जाता है।
2. मौसमी नदियाँ (Seasonal Rivers ):- वैसी नदियाँ जो केवल वर्षा ऋतू में बहती है और गर्मी में सुख जाती है। जिनका जल स्रोत केवल वर्षा होती है। इसका जल प्रवाह अनियमित और कम गहराई का होता है। जैसे :- लूनी नदी, घघगरा नदी, साबरमती नदी आदि।
3. पर्वतीय नदियाँ (Mountain Rivers ):- वैसी नदियाँ जो पर्वतीय क्षेत्रों से निकलती है। इस प्रकार की नदियों का प्रवाह (बहाव) तीव्र होती है। फलतः कटाव अधिक करती है और जलप्रपात भी बनती है। जैसे :- सिंधु नदी , अलकनंदा नदी,. यांगत्से नदी. आदि।
4. मैदानी नदियाँ (Plain Rivers) वैसी नदियाँ जो मैदान में धीरे-धीरे बहती है। इस प्रकार की नदियों का पाट चौड़ा होता है। इसके बहाव मार्ग घुमावदार होता है और उपजाऊ मिट्टियाँ जमा करती है , जैसे :- गंगा नदी, मिसिसिपी नदी, डेन्यूब नदी आदि।
5. अंतर्देशीय नदियाँ (Inland/Endorheic Rivers):- वैसी नदियाँ जो समुद्र तक नहीं पहुँच पाती और झील या रेगिस्तान में समाप्त हो जाती है। जैसे वोल्गा नदी, लूनी नदी आदि।
6. समुद्र में मिलने वाली नदियाँ (Exorheik Rivers):- वैसी नदियाँ जो सीधे समुद्र में जाकर मिलती है, जैसे :- गंगा नदी, नील नदी, अमेजन नदी आदि।
नदी के भाग (Parts of a River):-
प्रत्येक नदी के पांच भाग होते है।
1.उद्गम स्थल (Source): नदी जहाँ से निकलती है, उसे उद्गम स्थल कहते हैं। जो प्रायः पर्वत, हिमनद, झील या वर्षा क्षेत्र होता है।
2. ऊपरी प्रवाह (Upper Course):- नदी का प्रारम्भिक भाग ऊपरी प्रवाह कहलाता है। ज़हाँ नदी तेज़ गति से बहती है और अधिक कटाव करती है। प्रायः घाटियाँ और जलप्रपात यहीं बनते हैं।
3.मध्य प्रवाह (Middle Course):- यह नदी का मध्य भाग होता है। जहाँ नदी की गति धीमी हो जाती है और वह घुमावदार (मेन्डर) बनाती है प्रायः उपजाऊ मिट्टी का जमाव यहीं शुरू होता है।
4. निचला प्रवाह (Lower Course):- यह नदी का अंतिम बहाव क्षेत्र होता है। यहाँ नदी बहुत धीमी होती है और अधिक जमाव करती है। और प्रायः बाढ़ के मैदान और डेल्टा का निर्माण करती है।
5. मिलाप स्थल (Mouth):- जहाँ नदी समुद्र, झील या दूसरी नदी में मिलती है, उसे मिलाप स्थल कहते हैं।जैसे:- गंगा का मिलाप बंगाल की खाड़ी में होता है।
भारतीय नदियों का वर्गीकरण (classification of Indian Rivers):-
भारत की नदियों को मुख्यतः दो आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है:-
1. उद्गम और प्रकृति के आधार पर:- (इसके अंतर्गत हिमालयी बनाम प्रायद्वीपीय नदियों को रखा जाता है )
जैसे :-
हिमालयी नदियाँ (Himalayan Rivers):- जो नदियाँ हिमालय पर्वत से निकलती हैं, उन्हें हिमालयी नदियाँ कहते हैं। इन नदियों को हिमनद /ग्लेशियर और वर्षा दोनों माध्यम से जल प्राप्त होता है फलतः इन नदियों में सालो भर जल होता है , इसलिए इस नदी को बारहमासी (स्थायी ) नदी भी कहा जाता है। इन नदियों का मार्ग लम्बी और अनेक उपनदियाँ भी होती है जो इनमे आकर मिलती है। ऐसी नदियाँ उपजाऊ मैदान और डेल्टा का निर्माण करती है। ये नदियाँ कृषि के और धार्मिक तथा संस्कृतक दृष्टि से महत्वपूर्ण होती है। जैसे :- गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और सिंधु। इन नदियों में बाढ़ और नदी कटाव की भी समस्याएं होती है।
प्रायद्वीपीय नदियाँ (Peninsular Rivers):- जो नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार से निकलती हैं, उन्हें प्रायद्वीपीय नदियाँ कहते हैं। इन नदियों को केवल वर्षा से जल प्राप्त होता है अतः इन नदियों को केवल बरसात के मौसम में ही जल होता है इसलिए इस नदी को मौसमी नदी भी कहा जाता है। इनके मार्ग छोटे होते है और जलप्रपात का निर्माण करती है। ऐसी नदियां जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई और औधोगिक उपयोग के लिए सहायक होती है ,जैसे :-गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, महानदी, नर्मदाऔर ताप्ती। इन नदियों में सूखे में जल की कमी और अंतर -राजिय विवाद की समस्याएं होती है।
2. प्रवाह की दिशा के आधार पर:- ( इसके अंतर्गत पूर्ववाहिनी और पश्चिमवाहिनी नदियों को रखा जाता है . )
जैसे :-
पूर्ववाहिनी नदियाँ (East-Flowing Rivers) :- जो नदियाँ पूर्व दिशा में बहकर बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं, उन्हें पूर्ववाहिनी नदियाँ कहते हैं। ये नदियाँ कृषि के लिए उपुक्त होती है और डेल्टा का निर्माण करती है। जैसे :- गंगा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और महानदी। भारत की अधिकांश नदियां पूर्ववाहिनी नदियाँ है।
पश्चिमवाहिनी नदियाँ (West-Flowing Rivers):- जो नदियाँ पश्चिम दिशा में बहकर अरब सागर में मिलती हैं, उन्हें पश्चिमवाहिनी नदियाँ कहते हैं। इन नदियों का मार्ग छोटा और ढाल होता है। ऐसी नदियाँ डेल्टा नहीं मुहाना का निर्माण करती है। जैसे :- नर्मदा, ताप्ती, साबरमती, माही और लूनी।
नदियों से बनने वाले स्थलरूप (River-Made Landforms)
नदी अपने प्रवाह के दौरान कटाव (Erosion), परिवहन (Transportation) और जमाव (Deposition) की क्रियाओं करती है जिससे विभिन्न स्थलरूपों का निर्माण होता है जैसे :-
1 .घाटी (Valley):- नदी द्वारा काटकर बनाई गई लंबी और संकरी भूमि, को घाटी कहते हैं। जिसका निर्माण नदियों के ऊपरी बहाव में तेज गति के कारण चट्टानों के कटाव से बनती है। ये घाटी दो तरह के होते है (पर्वतीय क्षेत्रों में V- आकर की घाटी और मैदानी क्षेत्रों में चौड़ी घाटी। ये घाटियाँ मानव बस्तियां, कृषि भूमि और यातायात मार्ग के लिए महत्वपूर्ण होते है। जैसे :- हिमालयी क्षेत्र की घाटियाँ।
2. जलप्रपात (Waterfall):- जहाँ नदी ऊँचाई से अचानक नीचे गिरती है, उसे जलप्रपात कहते हैं। जिसका निर्माण कठोर व मुलायम चट्टानों का असमान कटाव तीव्र ढाल और तेज़ प्रवाह है। ये जलप्रपात जलविद्युत उत्पादन और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण होते है। जैसे :- जोग फॉल्स (कर्नाटक) . जलप्रपात का मुख्य समस्या अधिक कटाव और नदी का मार्ग परिवर्तन होता है।
3. मेन्डर (Meander):- मैदानों में नदी के घुमावदार मोड़ को मेन्डर कहते हैं। जब नदी की गति धीमी होती है, तब एक किनारे पर कटाव और दूसरे किनारे जमाव होता है जिससे मेंडर का निर्माण होता है, जिसका आकर S - जैसा होता है और उपजाऊ भूमि होता है जैसे :-गंगा का मैदानी भाग।
4. डेल्टा (Delta):- जहाँ नदी समुद्र में मिलती है, वहाँ नदी द्वारा लाए गए अवसादों का जमाव से डेल्टा का निर्माण होता है। कारण निचले प्रवाह में नदी की गति बहुत कम हो जाती है फलतः भारी मात्रा में गाद का जमाव होता है और जल धाराएं अनेक धाराओं में बट जाती है जिससे त्रिकोणाकार क्षेत्र का निर्माण होता है जो अत्यंत उपजाऊ भूमि होता है, जैसे :-गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा (सुंदरबन) .
5. बाढ़ का मैदान (Flood Plain):- जब में बाढ़ आता है तब नदी के किनारे स्थित समतल भूमि में बाढ़ का जल फैलता है। फलतः नदियों का गाद चारो ओर फैल जाता है और वह जम जाता है , जिससे एक उपजाऊ मैदान का निर्माण होता है। जैसे :- गंगा-यमुना का मैदान। हलाकि इससे जान-माल की छति भी होती है।
विश्व में कुल नदियों की संख्या – (Total Number of rivers in the world .)
“विश्व में नदियों की कोई निश्चित संख्या नहीं है। अनुमान के अनुसार पृथ्वी पर लाखों छोटी-बड़ी नदियाँ और धाराएँ पाई जाती हैं, जिनमें से केवल कुछ ही नदियाँ बहुत लंबी और प्रमुख हैं।” क्येंकि :-
*कुछ नदियाँ बहुत बड़ी होती हैं।
*कुछ बहुत छोटी (उपनदियाँ, मौसमी धाराएँ) होती हैं।
*कई नदियाँ बरसात में ही दिखाई देती हैं।
*कई नदियाँ बनती–मिटती रहती हैं।
(वैसे भूगोल विशेषज्ञों के अनुमानित जानकारी के अनुसार विश्व में कुल 30 - 35 लाख नदियाँ और धाराएं मानी जाती है जिसमें केवल लगभग 200 -250 नदियाँ ही प्रमुख नदियाँ मानी जाती हैं।
भारत में कुल नदियों की संख्या – (Total Number of rivers in India.)
“भारत में भी नदियों की कोई निश्चित संख्या नहीं है। देश में हज़ारों छोटी-बड़ी नदियाँ और उपनदियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से कुछ (लगभग 12 - 14 ) प्रमुख नदी प्रणालियाँ हैं।” जैसे :- गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु, गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा, कावेरी आदि
विश्व की प्रमुख नदियाँ - (Major Rivers of the world.)
“विश्व की प्रमुख नदियाँ अपने-अपने महाद्वीपों की सभ्यता, कृषि और अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। जैसे :-
1. नील नदी (Nile River) :- यह नदी अफ्रीका महाद्वीप में स्थित है जो विश्व की सबसे लम्बी नदी है। इसकी लम्बाई 6,650 किलो मीटर और औसत चौड़ाई -2 -3 किलो मीटर है। यह एक स्थाई (बारहमासी) नदी है जो विक्टोरिया झील से निकल कर भूमध्य सागर में गिरती है। प्राचीन मिस्र सभ्यता का विकास इसी नदी प्रणाली में हुई थी। यह नदी कृषि,सिंचाई, पेयजल और परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है।
2. अमेजन नदी (Amazon River):- यह नदी दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में स्थित है जो विश्व की सबसे चौड़ी और अधिक जल वाली नदी है। इसकी लम्बाई 6,400 किलोमीटर तथा औसत चौड़ाई (10- 50) किलोमीटर है। यह एक स्थाई (बारहमासी) नदी है जो एंडीज़ पर्वत से निकल कर अटलांटिक महासागर में मिलती है। यह नदी प्रणाली विश्व का सबसे बड़ा वर्षावन पोषित है जो जैव विविधता का संरक्षण और जलवायु संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।
3. यांग्त्से नदी (Yangtze River):- यह नदी एशिया महाद्वीप (चीन) में स्थित है जो एशिया की सबसे लम्बी नदी है। इसकी लम्बाई 6, किलोमीटर और औसत चौड़ाई (1 - 2 ) किलोमीटर है। यह एक स्थाई (बारहमासी) नदी है जो तिब्बती पठार से निकल कर पूर्वी चीन सागर में गिरती है। यह नदी जलविद्युत, कृषि, उद्योग और आंतरिक जल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है।
4. मिसीसिपी नदी (Mississippi River):- यह नदी उतरी अमेरिका महाद्वीप की प्रमुख व्यपारिक नदी है। इसकी लम्बाई 6,300 किलोमीटर और औसत चौड़ाई (1 - 2 ) किलोमीटर है। यह एक स्थाई (बारहमासी) नदी है जो लेक इटास्का से निकल कर मेक्सिको की खाड़ी गिरती है। यह नदी व्यपारिक परिवहन, कृषि उपज परिवहन और उद्योग विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
5. डेन्यूब नदी (Danube River):- यह नदी यूरोप महाद्वीप में स्थित है जो सबसे अधिक दशों से बहने वाली नदी है। इसकी लम्बाई 2,860 किलोमीटर और औसत चौड़ाई (0.5 - 1 ) किलोमीटर है। यह एक स्थाई (बारहमासी) नदी है जो ब्लैक फॉरेस्ट (जर्मनी) निकल कर काला सागर में गिरती है। यह नदी यूरोप का प्रमुख जलमार्ग, व्यपार और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है क्येंकि यह नदी कई देशों को जोड़ती है।
6. वोल्गा नदी (Volga River):- यह नदी यूरोप महाद्वीप (रूस) की अंतर्देशीय नदी है। जो रूस की सबसे महत्वपूर्ण नदी है। इसकी लम्बाई 3,530 किलोमीटर और औसत चौड़ाई (0.5 - 1 ) किलोमीटर है। जो वाल्दाई पहाड़ियाँ से निकलकर कैस्पियन सागर में गिरती है। यह नदी मत्स्य पालन और जल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत की प्रमुख नदियाँ - (Major Rivers of India.)
“भारत की प्रमुख नदियाँ देश की कृषि, संस्कृति और अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा हैं।”
1. गंगा नदी (Ganges River):- यह नदी भारत की सबसे बड़ी नदी है। इसकी लम्बाई 1,376 किलो मीटर और औसत चौड़ाई (0 .5 - 1 ) किलोमीटर है। यह एक स्थायी (हिमालयी नदी है जो गंगोत्री हिमनद (उत्तराखंड) से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। यह नदी उत्तर भारत की सबसे उपजाऊ घाटी, सिंचाई, पेयजल और धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्व के लिए महत्वपूर्ण है।
2. यमुना नदी (Yamuna River ):- यह नदी गंगा की सहायक नदी है। इसकी लम्बाई 1,376 किलोमीटर और औसत चौड़ाई (0.5 -1 ) किलोमीटर है। यह एक स्थायी (हिमालयी नदी है जो यमुनोत्री हिमनद से निकल कर प्रयागराज (गंगा में) मिलती है। यह नदी दिल्ली और उसके आस-पास में पेयजल, कृषि व उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है।
3. ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmputra River):- यह नदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है। इसकी लम्बाई 2,900 किलो मीटर और औसत चौड़ाई (2 - 10 ) किलोमीटर है। यह एक स्थायी (हिमालयी नदी है जो तिब्बत का मानसरोवर क्षेत्र से निकल कर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। यह नदी असम में अत्यन्त उपजाऊ भूमि और जल- विद्युत क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है।
4. सिंधु नदी (Indus River):- यह नदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है। इसकी लम्बाई 3,180 किलोमीटर और औसत चौड़ाई (1 - 2 ) किलोमीटर है। यह एक स्थायी (हिमालयी नदी है जो मानसरोवर झील के पास से निकल कर अरब सागर में गिरती है। यह नदी घाटी सिंधु घाटी सभ्यता का पोषक है।
5. गोदावरी नदी (Godawri River):- यह नदी दक्षिण भारत की सबसे लम्बी नदी है। इसकी लम्बाई 1,465 किलो मीटर और औसत चौड़ाई (0.5 -1 ) किलोमीटर है। यह एक प्रायद्वीपीय नदी है जो त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र) से निकल कर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। यह नदी सिंचाई और कृषि के लिए महत्वपूर्ण है।
6. कृष्णा नदी (krishan River):- यह नदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है। इसकी लम्बाई 1,400 किलो मीटर और औसत चौड़ाई (0.5 -1 ) किलोमीटर है। यह एक प्रायद्वीपीय नदी है जो महाबलेश्वर से निकल कर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। यह नदी सिंचाई, कृषि और जलविद्युत के लिए महत्वपूर्ण है।
7. नर्मदा नदी (Narmada River):- यह नदी भारत की प्रमुख पश्चिम वाहिनी नदी , जो पूरब से पश्चिम की ओर बहती है। इसकी लम्बाई 1,312 किलो मीटर और औसत चौड़ाई (0.3 -1 ) किलोमीटर है। यह एक प्रायद्वीपीय नदी है जो अमरकंटक से निकल कर अरब सागर में गिरती है। यह नदी सिंचाई और जलविद्युत के लिए महत्वपूर्ण है।
8. कावेरी नदी (Kaweri River):- यह नदी दक्षिण भारत की एक प्रमुख नदी है। इसकी लम्बाई 805 किलो मीटर और औसत चौड़ाई (0.2 -0.5 ) किलोमीटर है। यह एक प्रायद्वीपीय नदी है जो ब्रह्मगिरि पर्वत से निकल कर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। यह नदी दक्षिण भारत के धान्य फसलें और पेयजल के लिए महत्वपूर्ण है।
नदियों का महत्व-(Importance of River)
नदियाँ मानव सभ्यता की जीवनरेखा हैं। प्राचीन काल से लेकर आज तक मानव जीवन का विकास नदियों के आसपास ही हुआ है।“नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और विकास का आधार हैं। इनके संरक्षण के बिना मानव भविष्य सुरक्षित नहीं है। मनव जीवन में इनकी अनेकों महत्वपूर्ण योगदान है जैसे :-
1. कृषि में महत्व (Importance in Agriculture):- नदियाँ कृषि में सिंचाई का प्रमुख साधन। यह अपने साथ उपजाऊ मिट्टी (गाद) लाकर भूमि को उर्वरा प्रदान करती हैं जो खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि करता है।
2. पेयजल का स्रोत (Drinking Fountain) :- नदियाँ मानव और पशुओं के लिए जल आपूर्ति का साधन है।
3. औद्योगिक महत्व ( Industrial Importance):- नदियाँ हमारे उद्योगों के लिए जल ,कच्चे माल की धुलाई व शीतलन में काफी महत्वपूर्ण भमिका निभाती है। यही करण है कारखानों की स्थापना नदी किनारे किये जाते है।
4. जलविद्युत उत्पादन (Hydroelectric Power Generation):- नदियों में बाँधों के माध्यम से बिजली उत्पादन करने और स्वच्छ तथा नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त करने का सस्ता माध्यम प्रदान करता है। जैसे :- भाखड़ा-नांगल, सरदार सरोवर।
5. परिवहन और व्यापार (Transportation and Trade):- नदियाँ हमे सस्ता जल परिवहन प्रदान करती है जो हमारी आंतरिक व्यापार को बढ़ावा देता है। जैसे :- गंगा, मिसीसिपी।
6. सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व (Cultural and Religious Significance):- नदियाँ हमारे धार्मिक अनुष्ठान ,तीर्थ स्थल ,मेलों और उत्सवों का आयोजन को बढ़ावा देती है। जैसे :- गंगा, यमुना, नर्मदा।
7. पर्यावरणीय महत्व (Environmental Importance):- नदियाँ हमारे जैव विविधता का संरक्षण ,भूजल स्तर बनाए रखने और जलवायु संतुलन बनाने में मदद करती है।
8. मानव सभ्यता का विकास ( Development of Human Civilisation):-प्राचीन सभ्यताएँ नदियों के किनारे विकसित हुईं ,बसावट और नगरों के विकास नदियों की महतापूर्ण भूमिका है।, जैसे:- सिंधु, नील, मेसोपोटामिया।
9. पर्यटन और रोजगार (Tourism and Employment):- नदियों से पर्यटन स्थल ,मछली पालन ,स्थानीय रोजगार आदि भी प्राप्त होता है।
नदी और मानव सभ्यता -(River and Human Civilisation)
प्राचीन काल में मानव सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ, क्योंकि नदियाँ जल, उपजाऊ भूमि और परिवहन उपलब्ध कराती थीं। अतः हम कह सकते है की “नदियों ने मानव को जल, भोजन और सुरक्षा देकर महान सभ्यताओं की नींव रखी।”
जैसे :-
1. नील घाटी सभ्यता (Nile Valley Civilization):- लगभग 3000 ईसा पूर्व, मिस्र (अफ्रीका) में नील नदी की घाटी में मिस्र सभ्यता का निर्माण हुआ।
2.सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization):- लगभग 2500 ईसा पूर्व ,सिंधु नदी की घाटी में (भारत-पाकिस्तान क्षेत्र) में एक उन्नत सभ्यता का विकास हुआ था जिसको हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के नाम से जाना जाता है।
3. गंगा घाटी सभ्यता (Ganga Valley Civilization):- लगभग 1000 ईसा पूर्व के बाद ,गंगा नदी घाटी में उत्तरी भारतीय सभ्यता की आधारशिला रखी गई।
4. मेसोपोटामिया सभ्यता (Mesopotamia Civilization):- लगभग 3500 ईसा पूर्व, टाइग्रिस और यूफ्रेटिस नदी घाटी के पश्चिम एशिया (आधुनिक इराक) में विश्व की पहली नगरीय सभ्यता का विकास हुआ।
नदियों से जुड़ी समस्याएँ (River Related Problems):-
मानव की असावधानी के कारण नदियाँ प्रदूषण, अति दोहन और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही हैं।अतः नदियाँ आज मानव गतिविधियों के कारण गंभीर संकट में हैं। जैसे :-
1. प्रदूषण (Pollution):- आज नदियों का जल अशुद्ध होता जा रहा है , कारण हम मानव द्वारा घरेलू व औद्योगिक कचरे, धार्मिक अपशिष्ट व प्लास्टिक का परवाह किया जान। जिससे जलीय जीवों को हानि होती है।
2. अति दोहन (Over-Exploitation):- आज नदियों का जलस्तर गिरता जा रहा है, नदियाँ सूखने लगीं हैं, कारण अत्यधिक जल निकासी और कृषि व उद्योग में अधिक उपयोग।
3. बाँधों का प्रभाव (Impact of Dams):- नदियों में बनने वाले बांध से प्राकृतिक प्रवाह में बाधा उत्पन होता है जो न केवल जलीय जीव प्रभावित करता है बल्कि पर्यावरण असंतुलन और लोगों का विस्थापन जैसी समस्या उत्पन होता है।
4. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अनियमित वर्षा और हिमनद के पिघलने से कभी बाढ़, कभी सूखा की स्थिति पैदा होती है जिससे नदी तंत्र अस्थिर हो जाता है।
नदी संरक्षण के उपाय (River Conservation Measures):-
नदियाँ जीवन की आधारशिला हैं। अतः नदी संरक्षण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ जनभागीदारी आवश्यक है।”और इनके संरक्षण के लिए निम्न उपाय अत्यंत आवश्यक हैं—
1. प्रदूषण नियंत्रण (Pollution Control):- नदियों को प्रदुषण से बचाने के लिए प्लास्टिक व रसायनों पर नियंत्रण के साथ-साथ औद्योगिक व घरेलू कचरे को शुद्ध करके ही नदी में छोड़ा जाना आवश्यक है।
2. जल संरक्षण (Water Conservation):- नदियों के जल स्तर को संतुलित रखने के लिए जल का सीमित और विवेकपूर्ण उपयोग तथा वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना अति आवश्यक है।
3. वृक्षारोपण ( Tree Plantation):- नदी के किनारों का कटाव कम करने के लिए, नदी किनारों पर अधिक से अधिक पेड़ लगाना और वनों की कटाई पर रोक लगाना आवश्यक है।
4. जन जागरूकता (Public Awareness):- नदी संरक्षण में समाज की सहभागिता अति महवपूर्ण है अतः सामूहिक स्वच्छता अभियान के द्वारा लोगों को नदियों के महत्व के बारे में शिक्षित करना जरूरी है।
नदियों से जुड़े महत्वपूर्ण शब्द (Important Words related to rivers):-
नदी तंत्र का निर्माण करने में निम्न शब्दों का मह्त्वपूर्ण योगदान होता है जैसे :-
1.जलागम क्षेत्र (Drainage Basin):- वह पूरा क्षेत्र जहाँ का वर्षा जल बहकर किसी एक नदी प्रणाली में पहुँचता है जिसमे नदी और उसकी सभी उपनदियाँ भी शामिल होती हैं। जलगाम क्षेत्र कहलता है। जैसे :- गंगा नदी का जलागम क्षेत्र।
2. उपनदी (Tributary):- वह छोटी नदी जो किसी बड़ी नदी में मिलती है, उसे उपनदी कहते हैं।जैसे :- यमुना, गंगा की उपनदी है।
3. संगम (Confluence):- वह स्थान जहाँ दो या अधिक नदियाँ आपस में मिलती हैं। जैसे :- प्रयागराज में गंगा–यमुना संगम।
4. डेल्टा (Delta):- नदी द्वारा लाए गए गाद का जमाव, जो नदी के समुद्र में मिलने से पहले बनता है। और जिसका आकार प्रायः त्रिकोणाकार होता है। डेल्टा कहलाता है। जैसे :- गंगा–ब्रह्मपुत्र डेल्टा।
5. जल विभाजक (Watershed):-वह ऊँचा स्थल भाग जो दो नदियों या नदी प्रणालियों के जलागम क्षेत्रों को अलग करता है। जल विभाजक कहलाता है। जैसे :- विन्ध्य और सतपुड़ा पर्वतमालाएँ।
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