हमारी पृथ्वी ( Our Earth )

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हमारी पृथ्वी ( Our Earth )


पृथ्वी की परिभाषा (Definition of Earth):- 

पृथ्वी सौरमंडल का एक ग्रह है, जिस पर जीवन की सभी संभावित तत्व  (जैसे :- जल, वायु, भूमि तथा अनुकूल तापमान ) उपलब्ध है जिसके कारण यहाँ जीव-जंतु और मनुष्य का अस्तित्व कायम है। जो सूर्य से तीसरा ग्रह है।  यानि सौरमंडल में इसका स्थान ( सूर्य से क्रमशः बुध 🠊 शुक्र 🠊पृथ्वी 🠊मंगल ) है। 

पृथ्वी की आकर (Shape of Earth):-

पृथ्वी का  वास्तविक आकार "भू- आभ (Geo-id ) के आकार का है , जो पूरी तरह से नहीं बल्कि लगभग गोल होता है।  पृथ्वी भी पूरी तरह से गोल नहीं है।  इसके दोनों ध्रुव  (ऊपर, उतरी ध्रुव और निचे, दक्षिणी ध्रुव ) थोड़ी चपटी, थोड़ी उबड़-खाबड़  है और भूमध्य रेखा उभरा हुआ है। 

पृथ्वी का निर्माण (Formation of Earth ):- 

पृथ्वी की निर्माण की प्रक्रिया लगभग 4.5 अरब (Billion) साल पहले शुरू हुआ था। जो "सौर नीहारिका सिद्धांत" (Solar Nebula Theory) :- यानि प्रारम्भ में अंतरिक्ष में गैस (मुख्यतः हाइड्रोजन -हीलियम ) और धूल का विशाल बादल था।  जो कालांतर में गुरुत्वाकर्षण के कारण सिकुड़ने लगा, फलतः इसके केंद्र में सूर्य का निर्माण हुआ। और शेष बचे पदार्थ छोटे-छोटे कणों में विभाजित हो गया। ये कण "अभिवृद्धि प्रक्रिया (Accretion Process)" द्वारा आपस में टकराकर प्लैनेटेसिमल (Planetesimals)  बने, जो लगातार टकराव और जुड़ाव के कारण बड़े-बड़े पिंड बने जिनको प्रोटो-प्लैनेट (Protoplanet) कहा जाता है। इन्ही प्रोटो-प्लैनेट मे से पृथ्वी भी एक है। 

प्रारंभिक पृथ्वी:- 

प्रारम्भ में पृथ्वी बहुत गर्म, यानि एक आग की गोला जैसी थी।  जीसका तापमान लगभग 2000 डिग्री सेल्सियस से 4000 डिग्री सेल्सियस तक था। जिसके कारण, भरी तत्व (जैसे:- लोहा,निकेल, आदि ) द्रव रूप में थे जो निचे केंद्र की ओर डूब गए , जो पृथ्वी की भीतरी बनावट और  हल्का तत्व ऊपर की ओर आ गए, जो पृथ्वी की बाहरी बनावट के करक बने  इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में "ग्रह विभेदन (Planetary Differentiation) कहा जाता है।  

पृथ्वी की बाहरी बनावट (External Structure of Earth):-

पृथ्वी की बाहरी बनावट से तात्पर्य है ,उसकी सतह और उसके ऊपर मौजूद प्राकृतिक तत्वों जैसे :- भूमि, जल और वायुमंडल से, जो मिलकर जीवन के लिए उपयुक्त वातावरण बनाते है। जैसे :-

1 . स्थलमंडल (Lithosphere):- यह पृथ्वी की ठोस बाहरी सतह को कहते है। जिसके सतह पर महाद्वीप, पहाड़, मैदान, पठार सभी शामिल है, जो पृथ्वी का लगभग 29  प्रतिशत है। 

2 . जलमंडल (Hydrosphere):- यह पृथ्वी का सारा पानी को कहते है, जिसमे :- महासागर, नदियाँ, झीलें सभी शामिल है , जो पृथ्वी का लगभग 71 प्रतिशत है। इन्ही कारणों से पृथ्वी बहार से नीली दिखाई देती है। 

3 . वायुमंडल (Atmosphere):- यह पृथ्वी का सारा हवा जिसमे ऑक्सीजन के साथ-साथ अन्य गैसे होती है , जो हमे सांस लेने और सूर्य की हानिकारक किरनों से बचने में मदद करता है। जिसमे नाइट्रोजन 78 प्रतिशत, ऑक्सीज 21 प्रतिशत और अन्य 01 प्रतिशत है। 

पृथ्वी की भीतरी बनावट (Internal Structure of Earth):-

पृथ्वी की भीतरी बनावट से तात्पर्य है, उसके  अंदर की बनावट जो कई परत (Layers) से बनी है जैसे :-

1 . भूपर्पटी (Crust):- यह पृथ्वी की सबसे ऊपरी और पतली परत है, जिस पर हम सब रहते है।  इस की मोटाई लगभग 5 से 70 किलोमीटर तक होती है। इसके दो भाग है, पहला महासागरीय भूपर्पटी जिसकी मोटाई  लगभग 5 - 10 किलोमीटर तक है  और दूसरा महाद्वीपीय भूपर्पटी जिसकी मोटाई लगभग 30 - 70 किलोमीटर तक है। यह परत मुख्यतः सिलिका (Silica) और एल्युमीनियम (Aluminium) से बना है , जसमे चट्टानें, मिट्टी और खिनज पाए जाते है। जिसकी मात्रा लगभग (क्रमशः 60 % और 15 % ) है। सिलिका की मात्रा अधिक है। 

2 . मैंटल (Mantle):- यह पृथ्वी की मध्य परत है जो भूपर्पटी और कोर के बीच स्थित है, जो बहुत ही गरम और गाढ़ा द्रव के आकर में है।  इसमें चट्टानें धीरे-धीरे हिलते रहती है। यह पृथ्वी की सबसे मोटी परत है , जिसकी मोटाई लगभग 2,900 किलोमीटर और तापमान लगभग 1000 डिग्री सेल्सियस से 3000 डिग्री सेल्सियस तक है। और यह तापमान अंदर की ओर बढ़ता जाता है। यह परत पूरी तरह से ठोस नहीं है बल्कि अर्ध-द्रव (Semi -Liquid) है। जिसमे चट्टानें धीरे-धीरे बहती रहती है। मैंटल के इसी गति के कारण भूकंम्प और ज्वालमुखी होते है। प्लेट टेक्टॉनिक्स भी इसी पर आधारित है। 

3 . कोर (Core):- यह पृथ्वी की सबसे अंदरूनी परत है जो पृथ्वी की सबसे केंद्र (Centre) में स्थित है और यह परत सबसे गरम परत है, जो मुख्यतः लोहा (Iron) और निकेल (Nickel) से बनी है।  इसका तापमान लगभग 4000 डिग्री सेल्सियस से 6000 डिग्री सेल्सियस तक है जो सूर्य की सतह के बराबर माना जाता है। इस सतह के दो भाग है।  पहला, बहरी कोर (Outer Core) जो तरल  (Liquid) अवस्था में है और दूसरा, आंतरिक कोर (Inner Core) जो ठोस (Solid) अवस्था में है। इन्ही कोर के कारण पृथ्वी में चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) बनता है जो हानिकारक सौर किरणों से बचाने में मदद करता है। 

पृथ्वी की प्रमुख गतिविधियाँ (Earth's Major Activities):-

पृथ्वी की मुख्यतः दो गतिविधियाँ है जैसे :-

1 . घूर्णन (Rotation):- पृथ्वी अपने अक्ष (Axis) पर पश्चिम से पूरव दिशा की ओर 1,670 किलोमीर प्रति घंटे की रफ्तार से चक्कर लगती है, अर्थात घूमती है। जिसको एक चक्कर पूरा करने में 24 घंटे का समय लगता है।  जिसके परिणाम स्वरूप दिन और रात की प्रक्रिया होती है। अतः पृथ्वी की इसी गति को घूर्णन गति कहा जाता है। 

2 . परिक्रमण (Revolution):- पृथ्वी अपने एक निश्चित अंडाकार कक्षा (Orbit) पर ,सूर्य के चारों ओर, पश्चिम से पूरव की ओर (Anti -Clockwise) लगभग 1,08,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से परिक्रमा करती है।  जिसको एक परिक्रमा पूरी करने में 365 दिन 6 घंटे ( यानि 1 वर्ष ) का समय लगता है। जिसके परिणाम स्वरूप ऋतुओं में परिवर्तन और वर्ष का निर्धारण होता है। अतः पृथ्वी की इस परिक्रमा करने वाली गति को परिक्रमण कहा जाता है। 

पृथ्वी की वर्तमान स्थिति (Present Condition of Earth):- 

"पृथ्वी की वर्तमान स्थिति का तात्पर्य, उसके पर्यावरण, जलवायु, प्राकृतिक संसाधनों और जीवन पर पड़ रहे उनके प्रभावों की वर्तमान अवस्था से है।" जो चिंताजनक है।  कारण पृथ्वी पर बढ़ता प्राकृतिक संसाधनों का अप्रत्यासित दोहन और विकास के नाम पर हो रहा ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) जैसे  :- औधोगिक और वाहन से निकलने वाली जहरीली गैसें , जीवाश्म ईंधन का अत्यधिक उपयोग, कृषि और पशुपालन से निकलने वाली मीथेन गैस, कचरा और प्लास्टिक से फैलने वाले प्रदुषण तथा वनों की अंधाधुंध कटाई से  पृथ्वी के औसत तापमान में न केवल लगातार वृद्धि होने का संकेत प्राप्त हो रहा है बल्कि भूजल स्तर का लगातार घटना और कई पशु-पक्षी तथा पौधों की प्रजाति का विलुप्त होना पारिस्थितिकी सतुलन बिगड़ने का संकेत है ,जो पृथ्वी और पृथ्वी वासियों के लिए अच्छा संकेत नहीं है। और इस ग्लोबल-वार्मिंग का मुख्य कारण हम मानवीय गतिविधियाँ ही है। अतः पृथ्वी को सुरक्षित और सुंदर बनाये रखे के लिए हमे सकारात्मक प्रयास जैसे :- पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरकता पैदा करना, प्लास्टिक का उपयोग कम करना और स्वच्छ ऊर्जा (Solar, Wind) का प्रयोग को बढ़ावा देना, ज्यादा-से-ज्यादा पेड़ लगाना आदि जैसे कार्यो को जिम्मेदारी पूर्वक करना होगा। 

मुख्य बातें  :- 
*पृथ्वी की एक मात्र उपग्रह चन्द्रमा है। 
*पृथ्वी अपने अक्ष पर 23.5 डिग्री उतर की ओर झुकी हुई है। जो हमेशा एक ही दिशा में झुकी रहती है। 
*अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी नीले गोले जैसे दिखाई पड़ती है। 


पृथ्वी से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न  (ये प्रश्न न केवल परीक्षाओं में पूछे जाते हैं, बल्कि बच्चों के सामान्य ज्ञान के लिए भी आवश्यक हैं।)

1. पृथ्वी क्या है और इसको नीला ग्रह क्यों कहा जाता है ?

2. पृथ्वी की बाहरी बनावट कैसी है ?

3. पृथ्वी की तीन आतंरिक भाग कौन-कौन से है ?

4. पृथ्वी की कौन-कौन सी गतिविधियाँ है और उसके क्या प्रभाव है ?

5. पृथ्वी की घूर्णन और परिक्रमण गति में क्या अन्तर है ?

6. पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ ?

7. पृथ्वी पर जीवन संभव है क्यों ?

8. पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन क्यों होता है ?

9. पृथ्वी सूर्य से कौन सा ग्रह है ?

10. पृथ्वी की भूपर्पटी, मैंटल और कोर को परिभाषित करें ?

11. पृथ्वी के उपग्रह का नाम क्या है। 

12. पृथ्वी की वर्तमान स्थिति से आप क्या समझते है, प्रकाश डालें ?

 
नोट :- यह ब्लॉग बच्चों को स्टडी में स्पोर्ट करता है। इसी प्रकार के ज्ञानवर्धक पोस्ट्स के लिए इस ब्लॉग के मेनू बार में पोस्ट ड्राप डाउन विकल्प को चुनें।

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