वीर बाल दिवस
वीर बाल दिवस :-
(सच्चा वीर वही है, जो सत्य के लिए डटकर खड़ा रहे।)
वीर बाल दिवस हर साल 26 दिसंबर को मनाया जाता है। जिसकी घोषणा 2022 में सरकार द्वारा किया गया था।
यह तिथि उस इतिहास का छायावृति है जो दिसंबर 1704 में आज ही के दिन घटित हुआ था। इतिहास बताता है की 20 दिसंबर 1704 को कड़कती ठंड में अचानक आनंदपुर साहिब किले पर धावा बोल दिया गया। गुरु गोबिंद सिंह भी लड़ कर सबक सीखाना चाहते थे, लेकिन उनके दल में शामिल सिखों ने खतरे को भांप कर वहां से निकलने में भलाई समझा, अतः गुरु गोबिंद सिंह भी जत्थे की बात मानकर पूरे परिवार के साथ आनंदपूर किला छोड़ कर निकल गए। रास्ते में सरसा नदी में पानी का बहाव तेज होने के कारण गुरु गोबिंद सिंह का परिवार बिछड़ गया। इनके दो बड़े बेटे साहिबजादा - बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह उनके साथ चमकौर पहुंच गए जबकि उनके दो छोटे बेटे - बाबा जोरावर सिंह और बाबा फ़तेह सिंह उनकी माता गुजरी के साथ रह गए।
कहा जाता है की माता गुजरी के साथ गुरु गोबिंद सिंह का सेवक गंगू भी था जो उनको अपने घर ले आया था। और माता गुजरी के पास सोने के सिक्के को देखर लालच में आ गया और इनाम पाने के चाहत में कोतवाल को सूचना दे दी। फलतः माता गुजरी अपने दोनों छोटे पोतों के साथ गिरफ्तार कर ली गई। जब उन्हें सरहंद के नवाब वजीर खान के सामने पेश किया गया तब वजीर ने बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह को इस्लाम स्वीकारने को कहा लेकिंग दोनों ने धर्म बदलने से इंकार कर दिया तो नवाब ने 26 दिसंबर 1704 को दोनों छोटे भाईओं को जिन्दा दीवार में चुनवा दिया और माता गुजरी को सरहिंद के किले से धक्का देकर मार दिया।
इनका बलिदान यही सीख देता है कि :-
*हमेशा सच का साथ देना चाहिए।
*गलत काम के सामने डरना नहीं चाहिए।
*बड़ों का सम्मान करना चाहिए।
*अपने देश और संस्कृति पर गर्व करना चाहिए।
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